कमजोरी, झुनझुनी और भूलने की समस्या का कारण बन सकता है विटामिन B12 की कमी, – जानिए इसके लक्षण और उपाय

डेस्क: शरीर के सुचारू रूप से काम करने के लिए जितने जरूरी प्रोटीन और मिनरल्स हैं, उतने ही जरूरी विटामिन भी हैं। इन्हीं में से एक है विटामिन B12, जो शरीर की ऊर्जा, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और नसों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी धीरे-धीरे कई गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकती है — जिनमें थकान, भूलने की आदत, मूड स्विंग्स और नसों में कमजोरी शामिल हैं।

विटामिन्स के प्रकार

विटामिन्स दो प्रकार के होते हैं —

  1. फैट-सॉल्युबल विटामिन्स (Fat-soluble vitamins) – ये वसा में घुलते हैं और शरीर में स्टोर हो सकते हैं। इनमें विटामिन A, D, E और K शामिल हैं।
  2. वॉटर-सॉल्युबल विटामिन्स (Water-soluble vitamins) – ये पानी में घुलते हैं और शरीर में संग्रहित नहीं रहते। इसलिए इन्हें नियमित आहार से लेना जरूरी होता है। इनमें विटामिन C और B-कॉम्प्लेक्स समूह के विटामिन आते हैं।
    इसी B-कॉम्प्लेक्स में से विटामिन B12 (Cobalamin) सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

विटामिन B12 क्यों है जरूरी?

विटामिन B12 दिमाग और शरीर के लिए “फ्यूल” की तरह काम करता है।

  • यह रेड ब्लड सेल्स (RBCs) बनाने में मदद करता है।
  • नर्वस सिस्टम को स्वस्थ रखता है।
  • शरीर में ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाता है।
    इसकी कमी से व्यक्ति लगातार थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कमी और भूलने जैसी समस्याओं से जूझ सकता है।

विटामिन B12 की कमी के लक्षण

विटामिन B12 की कमी धीरे-धीरे असर दिखाती है, इसलिए अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। इसके मुख्य संकेत हैं:

  1. लगातार थकान या कमजोरी – बिना मेहनत के थक जाना या एनर्जी की कमी महसूस होना।
  2. मूड और मानसिक बदलाव – बार-बार भूलना, ध्यान केंद्रित न कर पाना, चिंता, डिप्रेशन या चिड़चिड़ापन।
  3. हाथ-पैरों में झनझनाहट – नसों में जलन या सुन्नपन महसूस होना, चलने में अस्थिरता।
  4. मुँह और जीभ की परेशानी – जीभ का लाल होना, स्वाद बदल जाना या मुँह में जलन।
  5. पाचन संबंधी दिक्कतें – कब्ज, भूख न लगना या पेट में असहजता।
  6. एनीमिया के लक्षण – त्वचा का पीला पड़ना, सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होना।
  7. बाल और नाखूनों की कमजोरी – बाल झड़ना या नाखूनों का टूटना।

विटामिन B12 के प्राकृतिक स्रोत

विटामिन B12 मुख्यतः जानवरों से प्राप्त खाद्य पदार्थों में पाया जाता है, जैसे —

  • अंडे, मछली, मांस, दूध, दही, पनीर
    वेजिटेरियन लोगों के लिए —
  • फोर्टिफाइड सीरियल्स, सोया मिल्क और न्यूट्रिशनल यीस्ट अच्छे विकल्प हैं।
    जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स या इंजेक्शन भी लिए जा सकते हैं, लेकिन बिना परामर्श के इनका सेवन नुकसानदायक हो सकता है।

 दिमाग पर विटामिन B12 की कमी का असर

विटामिन B12 की कमी का सीधा प्रभाव ब्रेन और नर्वस सिस्टम पर पड़ता है।

  1. याददाश्त कमजोर होना – न्यूरॉन्स की कार्यक्षमता घटने से चीजें याद रखने में कठिनाई होती है।
  2. मूड पर असर – यह न्यूरोट्रांसमीटर के संतुलन को प्रभावित करता है, जिससे डिप्रेशन और मूड स्विंग्स बढ़ सकते हैं।
  3. स्नायु तंत्र में समस्या – नसों की सुरक्षा परत (Myelin sheath) कमजोर पड़ जाती है, जिससे झुनझुनी या दर्द होता है।
  4. ब्रेन फंक्शनिंग का धीमापन – लंबे समय तक कमी रहने पर सोचने-समझने की क्षमता घट सकती है, और गंभीर मामलों में डिमेंशिया जैसी स्थिति भी बन सकती है।
  5. अन्य लक्षण – नींद में बाधा, चक्कर आना, और जीभ का सूखना जैसे संकेत भी देखे जा सकते हैं।

ध्यान रखें: विटामिन B12 की कमी को हल्के में न लें। अगर थकान, सुन्नपन या भूलने की समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से परामर्श लेकर ब्लड टेस्ट जरूर कराएं। सही आहार और समय पर इलाज से इस कमी को आसानी से दूर किया जा सकता है।

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