त्वचा ही नहीं, याददाश्त और मानसिक संतुलन भी बढ़ाता है विटामिन-ई

Vitamin E Benefits : अच्छी सेहत केवल बाहरी देखभाल से नहीं बनती, बल्कि इसके लिए शरीर को भीतर से मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। सही मात्रा में पोषक तत्व, खनिज और विटामिन मिलने पर ही शरीर पूरी तरह स्वस्थ रहता है। इन्हीं जरूरी पोषक तत्वों में एक अहम नाम है विटामिन-ई, जिसे अक्सर केवल त्वचा से जोड़कर देखा जाता है, जबकि इसका असर पूरे शरीर, खासकर मन और मस्तिष्क तक होता है।

विटामिन-ई एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, जो शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाता है। यह कोशिकाओं की झिल्लियों को मजबूत बनाता है और उन्हें लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद करता है। यही वजह है कि विटामिन-ई न सिर्फ त्वचा की चमक बनाए रखता है, बल्कि दिल की सेहत, मजबूत इम्युनिटी और बेहतर तंत्रिका तंत्र के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है।

कमी के संकेत धीरे-धीरे दिखते हैं

शरीर में विटामिन-ई की कमी अचानक नहीं, बल्कि धीरे-धीरे असर दिखाती है। शुरुआत में त्वचा का रूखा होना, समय से पहले झुर्रियां आना और बालों का झड़ना जैसे लक्षण नजर आते हैं। आगे चलकर मांसपेशियों में कमजोरी, थकान, आंखों की रोशनी में कमी, नसों में झनझनाहट और बार-बार एलर्जी की समस्या हो सकती है। गंभीर स्थिति में यह तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है, जिससे मन और मस्तिष्क पर सीधा असर पड़ता है।

रोजाना कितनी मात्रा जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वयस्क पुरुषों और महिलाओं को प्रतिदिन करीब 10 से 15 मिलीग्राम विटामिन-ई की जरूरत होती है। अच्छी बात यह है कि इसकी पूर्ति भोजन के जरिए आसानी से की जा सकती है और प्राकृतिक स्रोतों से मिला विटामिन-ई शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद होता है।

किन चीजों में मिलता है विटामिन-ई

विटामिन-ई बादाम, मूंगफली, सूरजमुखी के बीज, पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां, अंकुरित अनाज, तिल और सरसों का तेल, मूंगफली का तेल और एवोकाडो जैसे फलों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

सेवन का सही तरीका

विटामिन-ई वसा में घुलनशील विटामिन है, इसलिए इसे घी, तेल या प्राकृतिक वसा युक्त खाद्य पदार्थों के साथ लेने पर शरीर इसे बेहतर तरीके से अवशोषित करता है। इसके अलावा हरी सब्जियों को जरूरत से ज्यादा पकाने से बचना चाहिए, क्योंकि ज्यादा पकाने से उनमें मौजूद विटामिन नष्ट हो सकते हैं।

कुल मिलाकर, विटामिन-ई केवल सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर, मन और मस्तिष्क—तीनों को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है।

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