कुरुद में जलकुंभी से पटे नकटा तालाब की सफाई के लिए ग्रामीणों का जल सत्याग्रह

भिलाई । नगर निगम भिलाई के अंतर्गत वार्ड क्रमांक 22 कुरुद में जलकुंभी से बदहाल नकटा तालाब की सफाई की मांग को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। निगम प्रशासन की उपेक्षा और लगातार मिल रहे झूठे आश्वासनों से तंग आकर ग्रामीणों ने तालाब के पानी में उतरकर अनिश्चितकालीन जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है। सत्याग्रहियों के समर्थन में पार्षद पति अजय साहू भी तालाब में उतरे हैं। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक नगर निगम प्रशासन लिखित में सफाई शुरू होने की निश्चित तारीख नहीं देता, तब तक उनका यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

कुरुद वार्ड के निवासी क्षेत्र के मुख्य नकटा तालाब के साथ-साथ दर्री तालाब और घासीदास तालाब की सफाई न होने से खासे नाराज हैं। जलकुंभी से पूरी तरह पट जाने के कारण इन तालाबों का पानी उपयोग के लायक नहीं रह गया है। अपनी जायज मांगों की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए वार्ड के नागरिक नकटा तालाब के अंदर घुसकर पानी में खड़े हो गए और हाथों में विरोध की तख्तियां लेकर नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

ग्रामीणों के इस जल सत्याग्रह को स्थानीय जनप्रतिनिधियों का भी पूरा साथ मिला। वार्ड पार्षद अनिता साहू के पति अजय साहू ने ग्रामीणों की मांग को पूरी तरह जायज ठहराते हुए स्वयं तालाब के पानी में उतरकर सत्याग्रह में प्रत्यक्ष भागीदारी निभाई। उन्होंने कहा कि वार्डवासियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है, जिससे मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा है।

प्रदर्शनकारी भानुप्रताप सिंह ने बताया कि कुरुद के नागरिकों की भावना के अनुरूप नगर निगम को अनेकों बार नकटा तालाब सहित अन्य तालाबों की समुचित सफाई कराने के लिए ज्ञापन सौंपा गया था। हालांकि निगम प्रशासन की ओर से हर बार केवल आश्वासन ही दिया गया। उन्होंने बताया कि निगम आयुक्त सुरुचि सिंह को 5 अक्टूबर तक सफाई कार्य शुरू करने का अल्टीमेटम दिया गया था। तय सीमा तक काम शुरू न होने पर जब पुनः अधिकारियों से मुलाकात की गई, तो 6 अक्टूबर से काम शुरू करने का आश्वासन मिला। बावजूद इसके जब ज़मीन पर कोई काम शुरू नहीं हुआ, तो मजबूर होकर जल सत्याग्रह का रास्ता चुनना पड़ा।

जल सत्याग्रह में शामिल नागरिकों का कहना है कि अब वे केवल जुबानी आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। जब तक नगर निगम प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से लिखित में तालाब सफाई की तारीख घोषित नहीं की जाती, तब तक सत्याग्रही तालाब के पानी से बाहर नहीं निकलेंगे।

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