Healthy lifestyle : तेज़ रफ्तार जिंदगी और बढ़ता मानसिक दबाव आज इंसान के स्वभाव पर सीधा असर डाल रहा है। ऑफिस की डेडलाइन, घर की जिम्मेदारियां, लगातार मोबाइल इस्तेमाल और अधूरी नींद—ये सभी कारण व्यक्ति को भीतर से बेचैन बना रहे हैं। नतीजा यह होता है कि छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ने लगता है। कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि इंसान खुद चाहकर भी अपने क्रोध को नियंत्रित नहीं कर पाता, जिससे रिश्तों में तनाव, काम में गिरावट और सेहत से जुड़ी समस्याएं सामने आने लगती हैं।
ऐसे समय में योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन का भी प्रभावी साधन बन सकता है। योग विज्ञान में हाथों की मुद्राओं को मन और मस्तिष्क पर गहरा असर डालने वाला माना गया है। इन्हीं में से एक प्रमुख मुद्रा है ज्ञान मुद्रा, जिसे मानसिक शांति और आत्मसंयम बढ़ाने के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।
आयुष से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, जब मस्तिष्क पर अत्यधिक तनाव पड़ता है तो सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो जाती है और व्यक्ति भावनाओं के वश में आकर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगता है। ज्ञान मुद्रा का अभ्यास मस्तिष्क को स्थिरता देता है और तंत्रिका तंत्र को शांत करता है। रोजाना कुछ समय शांत वातावरण में बैठकर इस मुद्रा के साथ गहरी सांसों पर ध्यान केंद्रित करने से मन धीरे-धीरे संतुलित होने लगता है।
ज्ञान मुद्रा में अंगूठे और तर्जनी उंगली को आपस में मिलाया जाता है, जबकि बाकी उंगलियां सीधी रहती हैं। माना जाता है कि इस स्थिति में शरीर की ऊर्जा का प्रवाह संतुलित होता है और दिमाग से जुड़ी नसों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यही वजह है कि यह मुद्रा तनाव, बेचैनी और आक्रामकता को कम करने में सहायक मानी जाती है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति के स्वभाव में ठहराव आता है और भावनाओं पर नियंत्रण मजबूत होता है।
यह मुद्रा केवल गुस्से को शांत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक लाभ भी बताए जाते हैं। ज्ञान मुद्रा स्मरण शक्ति को बेहतर बनाती है और दिमाग को सक्रिय रखती है। विद्यार्थियों के लिए यह एकाग्रता बढ़ाने में मददगार है, वहीं कामकाजी लोगों के लिए मानसिक थकान कम करने का सरल उपाय बन सकती है। बुजुर्गों में यह मानसिक सतर्कता बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।
इसके अलावा, रोजाना ज्ञान मुद्रा का अभ्यास चिंता और तनाव को भी कम करता है। आज के समय में अनिद्रा, सिरदर्द और मानसिक बेचैनी जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं, जिनका संबंध सीधे तनाव से है। ज्ञान मुद्रा मन को शांत कर नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद करती है। साथ ही, इसे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने वाला अभ्यास भी माना जाता है, जिससे व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से खुद को अधिक संतुलित महसूस करता है।