नई दिल्ली। स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड और मोबाइल फिटनेस ऐप्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ये उपकरण लोगों को सक्रिय जीवनशैली अपनाने और रोजाना की शारीरिक गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करते हैं। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इन उपकरणों पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, फिटनेस ट्रैकर केवल कदमों या कैलोरी का रिकॉर्ड नहीं रखते, बल्कि लक्ष्य, स्ट्रीक, बैज और लगातार मिलने वाले अलर्ट के जरिए लोगों के व्यवहार को भी प्रभावित करते हैं। कई मामलों में इससे चिंता, तनाव, अपराधबोध और खान-पान से जुड़ी अस्वास्थ्यकर आदतें विकसित होने लगती हैं।
शोधकर्ताओं ने फिटनेस ट्रैकिंग से जुड़े चार प्रमुख जोखिम बताए हैं। पहला, प्रतिदिन 10,000 कदम चलने का लक्ष्य सभी लोगों के लिए वैज्ञानिक रूप से जरूरी नहीं है। कई अध्ययनों के अनुसार अधिकांश वयस्कों के लिए करीब 7,000 कदम भी पर्याप्त हो सकते हैं। इसके अलावा साइकिलिंग, तैराकी, शक्ति प्रशिक्षण और स्ट्रेचिंग जैसी गतिविधियां कई ट्रैकर्स में सही तरीके से दर्ज नहीं होतीं, जिससे लोगों को गलत धारणा बन सकती है कि केवल कदमों की संख्या ही फिटनेस का पैमाना है।
दूसरा जोखिम यह है कि लोग व्यायाम का आनंद लेने के बजाय केवल लक्ष्य पूरा करने पर ध्यान देने लगते हैं। लक्ष्य पूरा नहीं होने पर कई लोग निराश होकर न केवल फिटनेस ट्रैकर का इस्तेमाल छोड़ देते हैं, बल्कि नियमित व्यायाम भी बंद कर देते हैं।
तीसरा खतरा उपकरणों पर जरूरत से ज्यादा भरोसा करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिटनेस ट्रैकर हर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, बीमारी से उबरने की स्थिति, गर्भावस्था, चोट या नींद जैसी परिस्थितियों को पूरी तरह नहीं समझ सकते। इसलिए केवल उपकरण के आंकड़ों के आधार पर व्यायाम करना हमेशा सही नहीं होता।
चौथा जोखिम यह है कि लक्ष्य पूरा न होने पर उपयोगकर्ताओं में अपराधबोध और असफलता की भावना पैदा हो सकती है। जबकि किसी व्यक्ति की सक्रियता पर समय, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक जिम्मेदारियां, सुरक्षित वातावरण और स्वास्थ्य जैसी कई सामाजिक परिस्थितियां भी असर डालती हैं।
शोधकर्ताओं का सुझाव है कि फिटनेस ट्रैकर्स को केवल जानकारी देने वाले उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, न कि अंतिम निर्णय लेने वाले साधन के रूप में। भविष्य में ऐसे उपकरण विकसित किए जाने चाहिए जो अलग-अलग उम्र, स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता के अनुसार व्यक्तिगत लक्ष्य तय करें, आराम और रिकवरी को भी महत्व दें तथा शक्ति प्रशिक्षण सहित सभी प्रकार की शारीरिक गतिविधियों को समान प्राथमिकता दें।