Screen Time से बढ़ रहा आंखों पर खतरा, धुंधली नजर को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

हेल्थ डेस्क मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल स्क्रीन का लंबे समय तक इस्तेमाल आज की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। हालांकि, लगातार स्क्रीन देखने की आदत आंखों पर गंभीर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आंखों में जलन, सूखापन या धुंधली नजर जैसी समस्याओं को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।

क्या है डिजिटल आई स्ट्रेन?

नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाली समस्या को डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है। लगातार स्क्रीन पर फोकस बनाए रखने से आंखों की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है, जिससे आंखों में सूखापन, खुजली, जलन, पलकों में भारीपन, हल्का धुंधलापन और भौंहों के आसपास दर्द जैसी शिकायतें हो सकती हैं। आमतौर पर आराम और पर्याप्त नींद से ये लक्षण कम हो जाते हैं।

इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज

यदि आराम करने के बाद भी धुंधली नजर बनी रहे, चीजों पर फोकस करने में दिक्कत हो, दोहरी तस्वीर दिखाई दे या एक आंख की रोशनी दूसरी से कम लगे, तो यह गंभीर नेत्र रोग का संकेत हो सकता है। इसके अलावा अचानक तेज रोशनी की चमक दिखना, फ्लोटर्स (काले धब्बे) बढ़ जाना या नजर में टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएं दिखना भी रेटिना संबंधी समस्या की ओर इशारा कर सकता है।

आंखों को सुरक्षित रखने के आसान उपाय

विशेषज्ञ आंखों की सुरक्षा के लिए 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। इसके तहत हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। साथ ही जरूरत होने पर ब्लू लाइट फिल्टर वाले चश्मे का इस्तेमाल करें।

वर्कस्पेस को भी सही तरीके से व्यवस्थित करें। स्क्रीन आंखों से लगभग 20 से 28 इंच की दूरी पर रखें और उसे आंखों के स्तर से थोड़ा नीचे रखें। बहुत अंधेरे या अत्यधिक तेज रोशनी में स्क्रीन का उपयोग करने से बचें।

डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आंखों की परेशानी लगातार बनी रहे या नजर में बदलाव महसूस हो, तो स्वयं इलाज करने के बजाय तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए। समय पर इलाज से गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

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