दुबई। दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट का रणनीतिक महत्व आने वाले वर्षों में कम हो सकता है। क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए खाड़ी देशों ने तेल और गैस निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की दिशा में बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), इराक, ओमान और कुवैत नई पाइपलाइनों, रेल कॉरिडोर और स्टोरेज सुविधाओं पर अरबों डॉलर का निवेश कर रहे हैं, ताकि भविष्य में किसी भी संकट की स्थिति में ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।
यूएई इस रणनीति के तहत फुजैरा बंदरगाह तक नई वेस्ट-टू-ईस्ट क्रूड पाइपलाइन विकसित कर रहा है। यह परियोजना होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करते हुए सीधे तेल निर्यात की सुविधा देगी। इसके साथ ही रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन के लिए भी आधुनिक पाइपलाइन नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, जिससे देश की निर्यात क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
वहीं कुवैत, सऊदी अरब और यूएई के बीच एक संयुक्त पाइपलाइन कॉरिडोर पर भी चर्चा चल रही है। प्रस्तावित योजना के तहत कुवैत का तेल सुरक्षित स्थलीय मार्गों से सऊदी अरब या यूएई के बंदरगाहों तक पहुंचाया जाएगा, जहां से इसे वैश्विक बाजारों में निर्यात किया जा सकेगा।
इराक भी अपने तेल निर्यात के लिए नए विकल्प तलाश रहा है। बसरा से जॉर्डन के अकाबा बंदरगाह और ओमान के दुक्म बंदरगाह तक पाइपलाइन नेटवर्क विकसित करने की योजनाओं पर काम चल रहा है। इसके अलावा तुर्किये के साथ जुड़ी किर्कुक-जेहान पाइपलाइन को भी आधुनिक बनाने की प्रक्रिया जारी है, जिससे भूमध्य सागर तक तेल पहुंचाने की क्षमता बढ़ सके।
खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ओमान को एक प्रमुख ऑयल स्टोरेज और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। कुवैत और ओमान के बीच बड़े पैमाने पर तेल भंडारण सुविधाओं को लेकर बातचीत जारी है, जिससे आपात परिस्थितियों में वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
केवल तेल ही नहीं, प्राकृतिक गैस के निर्यात के लिए भी नए कॉरिडोर विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। कतर से सऊदी अरब, जॉर्डन और मिस्र होते हुए गैस सप्लाई नेटवर्क तथा यूरोप तक पहुंचने वाले संभावित ऊर्जा गलियारों पर विचार किया जा रहा है। साथ ही लंबे समय से प्रस्तावित ‘गल्फ रेलवे प्रोजेक्ट’ को भी गति दी जा रही है, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन रेल मार्ग से किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति को अधिक सुरक्षित, लचीला और विविध बनाना है। इससे क्षेत्रीय तनाव या समुद्री मार्गों में व्यवधान की स्थिति में भी वैश्विक बाजारों तक तेल और गैस की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।