डेस्क: अगर हाथ या पैरों के नाखून सामान्य से ज्यादा मोटे, कमजोर या बदरंग नजर आने लगे हैं, तो इसे केवल कॉस्मेटिक समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नाखून का नेल बेड से अलग होना, रंग का सफेद, भूरा या काला पड़ना और नाखून का कमजोर होकर टूटने लगना फंगल इंफेक्शन के संकेत हो सकते हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में माइकोटिक नेल या ओनिकोमाइकोसिस कहा जाता है।
क्या है माइकोटिक नेल?
माइकोटिक नेल नाखूनों में होने वाला एक फंगल संक्रमण है। इसमें फंगस नाखून की परतों या उसके आसपास की त्वचा में मौजूद छोटी दरारों के जरिए प्रवेश कर सकता है। संक्रमण बढ़ने पर नाखून मोटा और कमजोर हो सकता है तथा उसका रंग भी बदल सकता है।
पैरों के नाखूनों में यह समस्या हाथों के नाखूनों की तुलना में अधिक देखी जाती है। उम्र बढ़ने के साथ इसके मामले भी बढ़ सकते हैं।
किन लोगों में ज्यादा खतरा?
माइकोटिक नेल किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ स्थितियों में इसका खतरा अधिक माना जाता है। डायबिटीज, कमजोर इम्यून सिस्टम, एथलीट फुट, ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्या या नाखून में चोट लगने वाले लोगों में संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है।
इसके अलावा लगातार बंद जूते पहनना, ऐसे स्थानों पर नंगे पैर चलना जहां फंगल संक्रमण फैल सकता है, साझा शॉवर एरिया का इस्तेमाल और धूम्रपान जैसे कारक भी जोखिम से जुड़े हो सकते हैं। कुछ मामलों में पारिवारिक यानी जेनेटिक कारण भी भूमिका निभा सकते हैं।

नाखूनों में किस तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं?
फंगल इंफेक्शन होने पर नाखून में अलग-अलग तरह के बदलाव दिखाई दे सकते हैं। नाखून मोटा होने के साथ कमजोर हो सकता है और नेल बेड से अलग भी हो सकता है। इसके अलावा नाखून का रंग सफेद, पीला, भूरा या कुछ मामलों में काला पड़ सकता है।
फंगल इंफेक्शन के कई प्रकार होते हैं। इनमें डिस्टल लेटरल सब-अंगुअल ओनिकोमाइकोसिस सबसे आम प्रकार माना जाता है। इसके अलावा प्रॉक्सिमल सब-अंगुअल, सतही ओनिकोमाइकोसिस, एंडोनिक्स ओनिकोमाइकोसिस और फंगल मेलानोनिकिया भी इसके विभिन्न रूप हैं।
उम्र बढ़ने के साथ बढ़ सकता है खतरा
उपलब्ध स्वास्थ्य जानकारी के अनुसार, सामान्य आबादी में लगभग 10 प्रतिशत लोगों को जीवन में कभी न कभी नाखून के फंगल संक्रमण की समस्या हो सकती है। उम्र बढ़ने के साथ इसकी संभावना बढ़ती है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में यह समस्या करीब 20 प्रतिशत और 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में करीब 50 प्रतिशत तक बताई गई है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर नाखून लगातार मोटा हो रहा है, उसका रंग बदल रहा है, वह टूटने लगा है या नाखून अपने बेड से अलग हो रहा है, तो डॉक्टर या त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच कराना उचित है। क्योंकि नाखून में बदलाव हमेशा फंगल संक्रमण के कारण ही नहीं होते। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार तय किया जा सकता है।
नोट: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी नाखून संबंधी समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।