हेल्थ डेस्क। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, बेचैनी और नींद की कमी जैसी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में योग और प्राणायाम को मानसिक शांति और तनाव प्रबंधन के लिए उपयोगी माना जाता है। भ्रामरी प्राणायाम भी ऐसी ही एक सरल श्वास तकनीक है, जिसमें सांस छोड़ते समय भौंरे जैसी गुंजन की आवाज निकाली जाती है।
क्या है भ्रामरी प्राणायाम?
‘भ्रामरी’ शब्द का संबंध भौंरे से है। इसका नाम सांस छोड़ते समय निकलने वाली गुंजन जैसी ध्वनि के कारण पड़ा है। इस अभ्यास में शांत होकर सांस अंदर ली जाती है और धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए मधुमक्खी या भौंरे जैसी ‘म्…’ की ध्वनि की जाती है।
मन को शांत करने में मदद
आयुष मंत्रालय के अनुसार, भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत करने और तनाव कम करने में मदद कर सकता है। नियमित अभ्यास से बेचैनी और मानसिक तनाव को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है। ध्यान और एकाग्रता बढ़ाने के लिए भी इसे योग अभ्यास का हिस्सा बनाया जाता है।
छात्रों के लिए भी शांत वातावरण में किया गया यह अभ्यास ध्यान लगाने में मददगार हो सकता है। हालांकि, किसी भी प्राणायाम को इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए और लगातार नींद, चिंता या अन्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
कैसे करें भ्रामरी प्राणायाम?
सबसे पहले आरामदायक स्थिति में बैठें और आंखें बंद कर लें। सामान्य तरीके से सांस अंदर लें। इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए भौंरे जैसी गुंजन की आवाज निकालें। आवाज को सहज रखें और सांस को जबरदस्ती रोकने या खींचने की कोशिश न करें। शुरुआत में थोड़े समय तक अभ्यास करें और अपनी सुविधा के अनुसार अवधि बढ़ा सकते हैं।
इन सावधानियों का रखें ध्यान
भ्रामरी प्राणायाम आमतौर पर सरल अभ्यास है, लेकिन इसे सही तरीके से करना जरूरी है। इसे खाली पेट या भोजन के कुछ घंटे बाद करना बेहतर माना जाता है। गुंजन की आवाज बहुत तेज करने या सांस पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालने से बचें।
कान या साइनस से जुड़ी गंभीर समस्या, हृदय रोग या गर्भावस्था की स्थिति में अभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य योग विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है। अभ्यास के दौरान चक्कर, दर्द या किसी तरह की असुविधा महसूस हो तो तुरंत रोक दें। नियमित योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।